भ्रष्टाचार - आयुष विभाग में नई-नई चर्चायें

भोपाल।  शुक्रवार 29 नवम्बर, 2019 इस समय मध्य प्रदेश के गलियारों में आयुष विभाग का भ्रष्टाचार चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला है आयुष विंग के होम्यो पैथी एवं यूनानी चिकित्सा विभाग में कई वर्षों से परिवीक्षा काल पर नियुक्त डाक्टरों के स्थाई कारण का। चर्चा है कि होम्यो पैथी के 170  एवं यूनानी के 26  चिकित्सकों  से मोटी रकम बसूली के बाद भी न तो चिकित्सकों कि परिवीक्षा अवधि समाप्ति की गई न ही स्थाईकरण का आदेश निकला। गौरतलब बात तो यह है कि इस मामले में विभाग से जुड़ी अपर मुख्य सचिव श्रीमती शिखा दुबे जो कि अपर मुख्य सचिव स्तर की एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी है का नाम चर्चा के केंद्र में है। सूत्रों का कहना है कि  जे के गुप्ता नामक डाक्टर जो पूर्व में संचालनालय में विशेष कर्त्तव्य अधिकारी के रूप में पदस्त था जिसे अपर मुख्य सचिव का करीबी बताया जा रहा है के माध्यम से बसूली की गई है। वैसे कहने के लिए तो डॉक्टर जे के गुप्ता को भ्रष्टाचार के कई मामलों में संलिप्तता के कारण बालाघाट जिले कि परसबाड़ा डिस्पेंसरी में पदस्त किया गया है लेकिन वहा इसकी नाम मात्र की पस्थापना है।डॉक्टर जे के गुप्ता के संबंध में जब परसबाड़ा डिस्पेंसरी में पता किया गया तो पता चला कि दो माह पहले एकात दिन के लिए आए थे। वैसे इन दिनों मंत्रालय एवं संचालनालय आयुष के गलियारों में घूमते दिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि परिवीक्षा काल पर नियुक्त डाक्टरों में हड़वड़ी का माहौल इसलिए निर्मित हुआ जिस अधिकारी से काम कराने के नाम पर बसूली की गई वहअधिकारी 30 नबम्बर को सेवानिवृत्ति हो जाएगा। इधर संचालनालय सूत्रों का कहना है कि आयुक्त  संचलनालय संजीव कुमार झा को जैसे ही इस प्रकरण पर भ्रष्टाचार की भनक लगी उन्होंने कार्रवाई विवरण पर हस्ताक्षर करने से ही मना कर दिया। अब देखना यह है कि डॉक्टरों का स्थाई करण होता है या ये कहावत चरितार्थ होती है `दुविधा में दोनों गए माया मिली न राम' वैसे शासन नियमानुसार जिन व्यक्तियों को परिवीक्षा पर नियुक्त किया जाता है ,उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्ते)नियम 1961 के नियम 8 के उपनियम (6 ) के अनुसार परिवीक्षा काल कीअवधि पूरी होने पर स्थाई प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

 
 
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