मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव - राज्य निर्वाचन आयोग के गले की फांस

भोपाल : शनिवार, दिसम्बर 18, 2021,मध्यप्रदेश में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश-2021 की अधिसूचना पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,भाजपा सरकार एवं मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के गले की फांस बनता नजर आ रहा है। 
आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग बसंत प्रताप सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के पालन में मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा त्रि-स्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन वर्ष 2021-22 के लिए जारी कार्यक्रम के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पंच, सरपंच, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत सदस्य के पदों की निर्वाचन प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार अन्य पदों के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी और पंचायत चुनाव तय समय पर कानून के दायरे में होंगे। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट केआदेश का पालन किया जाएगा। मध्य प्रदेश में चुनाव तय समय पर ही होंगे और पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में होगी। ओबीसी सीटों पर फिलहाल चुनाव स्थगित रहेंगे और आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव घोषित किए जाएंगे।
आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है कि परिसीमन और आरक्षण यह दोनों विषय मध्य प्रदेश सरकारी से जुड़ी है, इसकी कार्यवाही शासन को करना है। बैठक में चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर विस्तार से मंथन कर निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद आयोग शुक्रवार देर रात ओबीसी सीटों का चुनाव और जिला-जनपद पंचायत पदाधिकारियों को लेकर आज होने वाली आरक्षण की प्रक्रिया निरस्त कर चुका है।
आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है कि आज सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर विचार के लिए अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में के.कृष्णमूर्ति एवं विकास किशन राव गवली प्रकरण में दिए गए निर्णय का भी अध्ययन किया गया आयुक्त ने बताया कि राज्य सरकार को पत्र लिख रहे हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों के संबंध में रि-नोटिफाई करने की कार्रवाई एक सप्ताह में कर आयोग को सूचित करें, जिससे इन स्थानों पर यथाशीघ्र निर्वाचन करवाया जा सके। उन्होंने बताया कि आरक्षण के संबंध में कार्यवाही का अधिकार राज्य सरकार को है।
  आयुक्त ने कहा है कि जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि 17 दिसंबर 2021 तक अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों द्वारा उनके लिए आरक्षित पदों के लिए जो नाम निर्देशन-पत्र प्रस्तुत किए गए हैं, उन्हें सुरक्षित रखा जाए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जिला पंचायत सदस्य  के 155, जनपद पंचायत सदस्य के 1273, सरपंच के 4058 और पंच के 64 हजार 353 पद आरक्षित हैं।
वैसे कुछ संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करने से चुनाव की अधिसूचना ही खंडित हो गई है। इसके चलते नए सिरे से चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी या पूरा चुनाव ही स्थगित करना पड़ सकता है। फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग को संबैधानिक दायरे में रह कर निर्वाचन कार्य संपादित करने को कहा है। जनता को आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग के अंतिम फैसले का इंतजार है।

 
 
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