CBI vs ममता / नारदा केस में 2 मंत्रियों समेत 4 नेताओं को स्पेशल कोर्ट ने दी जमानत

सोमवार, 17 मई 2021, पश्चिम बंगाल के चर्चित नारदा स्टिंग केस में ममता बनर्जी के दो मंत्रियों समेत चार नेताओं को CBI की विशेष कोर्ट ने देर शाम जमानत दे दी। 
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। इससे पहले जांच एजेंसी ने सोमवार को कई जगह छापे मारे थे। इसके बाद ममता सरकार में मंत्री फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर शोवन चटर्जी से पूछताछ की थी। पूछताछ के बाद सभी को अरेस्ट कर लिया गया था। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था। CBI कोर्ट से इन चारों नेताओं की कस्टडी चाहती थी, लेकिन शाम को जस्टिस अनुपम मुखर्जी की विशेष अदालत ने इन्हें 50-50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। हालांकि, कोर्ट ने चारों को जांच अधिकारी के बुलावे पर हाजिर होने का निर्देश दिया है।


इधर, CBI की सुबह की कार्रवाई के बाद एक बार फिर केंद्रीय एजेंसी और बंगाल सरकार के बीच तनातनी दिखी। अपने मंत्रियों से पूछताछ के दौरान ही बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी CBI के दफ्तर पहुंचीं। उन्होंने CBI से कहा कि आप मुझे भी गिरफ्तार करिए। सिर्फ TMC नेताओं पर ही कार्रवाई क्यों हो रही है? भाजपा में गए मुकुल रॉय और शुभेंदु अधिकारी पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया जा रहा? ममता बनर्जी करीब 6 घंटे तक CBI के ऑफिस में ही मौजूद रहीं। देर शाम कोर्ट के फैसले के बाद वो वहां से लौट गईं।


उनके वकील ने भी कहा कि बिना नोटिस के मंत्रियों और विधायक को अरेस्ट नहीं किया जा सकता है। ममता के CBI दफ्तर जाने के बाद तृणमूल कार्यकर्ता भी वहां जमा हो गए और पथराव किया। इसके बाद पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। बंगाल में कई जगहों पर CRPF जवानों, CBI पर्सनल्स और भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी हमले की खबरे हैं। इसके बाद बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने राज्य में फैल रही हिंसा को लेकर ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। इसकी कॉपी राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भी भेजी गई है।


आपको बता दें कि 2016 में बंगाल में असेंबली इलेक्शन से पहले नारदा न्यूज पोर्टल ने जुड़े टेप जारी किए गए थे। इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद दावा किया गया कि टेप 2014 में रिकॉर्ड किए गए हैं। टेप के हवाले से तृणमूल के मंत्री, सांसद और विधायकों पर डमी कंपनियों से कैश लेने के आरोप लगाए गए थे। कलकत्ता हाईकोर्ट में ये मामला पहुंचा था। हाईकोर्ट ने 2017 में इसकी CBI जांच के आदेश दिए थे।

 
 
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