प्रधानमंत्री ने धोनी को लिखा तारीफ और शुभकामनाओं का लेटर, धोनी ने कहा शुक्रिया

नई दिल्ली। गुरुवार, 20 अगस्त 2020, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी को चिट्ठी लिखी है। प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा है कि आपने अपने खास अंदाज में जो वीडियो शेयर किया था, वह पूरे देश के लिए चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, 130 करोड़ भारतीयों को निराशा हुई, लेकिन आपके भारतीय क्रिकेट के लिए जो किया, उसके लिए सभी आभारी हैं।


महेंद्र सिंह धोनी ने प्रधानमंत्री की चिट्ठी ट्विटर पर शेयर की –


धोनी ने प्रधानमंत्री का शुक्रिया जताते हुए ट्वीट किया, ‘एक कलाकार, फौजी और खिलाड़ी को बस ये चाहिए होता है कि उसकी हौसला अफजाई हो और उसकी कड़ी मेहनत और बलिदान को सब लोग याद रखें। तारीफ और शुभकामनाओं के लिए आपका शुक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।’


प्रधानमंत्री की चिट्ठी में लिखी खास बातें –


भारतीयों की मौजूदा पीढ़ी फैसला करने वाले हालात में हिम्मत नहीं छोड़ती, हमने यह बात आपकी कई पारियों में देखी है। यह मायने नहीं रखता कि आपने कौन-सी हेयरस्टाइल रखी थी, लेकिन जीत हो या हार, आपका मन और दिमाग हमेशा शांत रहा। यह देश के हर युवाओं के लिए सबसे अहम सीख है। मैं भारत के सशस्त्र बलों से आपके जुड़ाव का खास तौर पर जिक्र करना चाहूंगा। आप आर्मी के लोगों के साथ जुड़कर बेहद खुश थे।


आपके क्रिकेट करियर को स्टेटिस्टिक्स के प्रिज्म के जरिए देखा जा सकता है। आप भारत के सबसे कामयाब कप्तानों में से एक रहे हैं। आपके प्रयासों से देश, दुनिया में नंबर एक तक पहुंचा। आपका नाम दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार किया जाएगा। आप निश्चित ही दुनिया के बेहतरीन विकेटकीपर रहे हैं।मुश्किल हालात से निकालना आपकी खूबी रही है। मैच को खत्म करने का आपका अंदाज भी लाजवाब रहा है, खासकर 2.1. वर्ल्ड कप में। लोगों के जेहन में इसकी याद हमेशा ताजा रहेगी।


पीएम मोदी ने लिखा, "एक छोटे शहर से उठकर आप राष्ट्रीय पटल पर छा गए, आपने अपने लिए नाम बनाया और सबसे महत्वपूर्ण देश को गौरवांवित किया. आपकी तरक्की और उसके बाद के जीवन ने उन करोड़ो नौजवानों को प्रेरणा दी तो महंगे स्कूलों या कॉलेजों में नहीं गए, न ही वो किसी प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं लेकिन उनके पास स्वयं को सर्वोच्च स्तर पर स्थापित करने की क्षमता है."


उन्होंने चिट्ठी में आगे लिखा, "आपमें नए भारत की आत्मा झलकती है, जहां युवाओं की नियति उनका परिवार का नाम तय नहीं करता है, बल्कि वो अपना खुद का मुकाम और नाम हासिल करते हैं. हम कहां से आए हैं यह बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता जब तक हमें यह मालूम हो कि हम किस दिशा में जा रहे हैं- आपने यही भावना प्रदर्शित की और कई युवाओं को इससे प्रेरित किया."

 
 
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