माया के 'स्मारकों' की जांच शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बसपा शासनकाल में स्मारकों के निर्माण में सरकारी धन की लूट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जो बलुआ पत्थर मीरजापुर व चुनार से सीधे लखनऊ लाया जा सकता था, उसे तराशने के लिए 670 किलोमीटर दूर राजस्थान के बयाना ले जाया गया। फिर उसे बयाना से 450 किलोमीटर दूर लखनऊ लाया गया। कैग ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यदि तराशी मीरजापुर में होती तो ढुलाई पर खर्च हुए 15.60 करोड़ रुपये बच जाते।

कैग की रिपोर्ट कहती है कि लखनऊ में डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल के निर्माण पर 366 करोड़ व काशीराम स्मारक स्थल पर 514 करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन नक्शों में बार-बार बदलाव, नए कार्यो को जोड़ने से 31 दिसंबर, 2009 तक इसकी लागत 2451.93 करोड़ तक पहुंच गई। बाद के वर्षो में तो इसकी लागत और बढ़ी। स्मारकों के निर्माण में लगभग पांच हजार करोड़ के घोटाला की बात कही जा रही है। बहरहाल, उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार की ओर से कानूनी दुश्वारियां दूर करने के बाद लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने स्मारकों के निर्माण की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने चार अधिकारियों को नोटिस जारी की है। 19 जुलाई से उनके बयान दर्ज होंगे। बृहस्पतिवार को उन्होंने घोटाले संबंधी फाइलों की समीक्षा की।

 
 
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