राहुल ने आदिवासियों के साथ नृत्य किया; कहा- भाई को भाई से लड़ाकर देश का फायदा नहीं होगा

रायपुर शुक्रवार 27 दिसम्बर, 2019 . कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर में पहली बार हो रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की थाप पर उन्होंने बस्तर के आदिवासी कलाकारों के साथ नृत्य भी किया। समारोह में केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए राहुल ने कहा कि भाई को भाई से लड़ाने में देश का फायदा नहीं है। सबको साथ लिए बिना देश की अर्थव्यवस्था नहीं चलाई जा सकती। राहुल ने कहा कि जब तक लोगों की आवाज लोकसभा, विधानसभा मे नहीं गूंजेगी, तब तक व्यवस्था नहीं बदल पाएगी।
राहुल ने कहा कि देश की हालत, किसानों की समस्या, आत्महत्या, अर्थव्यवस्था की हालत और बेरोजगारी के बारे में सब जानते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ की सरकार जनता के साथ मिलकर काम कर रही है। यह सरकार लोगों की आवाज सुनती है। विधानसभा में सबकी आवाज सुनाई देती है। सरकार चलाने में आपके विचारों को शामिल किया जा रहा है। तेंदुपत्ता, सुपोषण, जमीन वापसी को लेकर सरकार काम कर रही है। पहले यहां जो हिंसा हुआ करती थी, उसमें कमी आई है।
देश को जोड़ेंगे नहीं, तो यह आगे नहीं बढ़ेगा: राहुल
उन्होंने कहा, 'मैं एक बात कहना चाहता हूं बिना हर धर्म, जाति, आदिवासी, दलितों को लिए बिना हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था नहीं चलाई जा सकती। जब तक इस देश को जोड़ेंगे नहीं, यह देश आगे नहीं बढ़ेगा। मैं हर भाषण में कहता हूं कि अर्थव्यवस्था को आदिवासी-किसान चलाते हैं। अगर आप पूरा पैसा कुछ लोगों को दे दोगे, नोटबंदी करोगे, गलत जीएसटी लागू करोगे तो अर्थव्यवस्था नहीं चल सकती है।”
मुख्यमंत्री ने राहुल को गोबर से तैयार नेम प्लेट गिफ्ट की
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने माड़िया गौड़ सींग पहनाकर राहुल गांधी का स्वागत किया। उन्होंने राहुल गांधी को गोबर से तैयार नेम प्लेट भी गिफ्ट की। राहुल ने बस्तर के आदिवासी कलाकारों के साथ नृत्य भी किया।
39 जनजातियों के कलाकार प्रस्तुति देंगे
रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में शुरू हुए तीन दिवसीय नृत्य महोत्सव आदिवासी कला और संस्कृति के रंग में सजा हुआ है। छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसने अब अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव का रूप ले लिया है। तीन दिवसीय इस नृत्य महोत्सव में देश के 25 राज्य और केंद्र शासित राज्यों के साथ ही 6 देशों के करीब 1350 से अधिक कलाकार अपनी जनजातीय कला संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। इसमें बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, यूगांडा, बेलारूस और मालदीव के कलाकार भी शामिल हो रहे हैं।

 
 
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