आओं जाने मंदसौर किसान आंदोलन से जिन घरों के चिराग बुझे वो कौन हैं

ध्यप्रदेश के मंदसौर का किसान आंदोलन का तांडव और पुलिस की बर्बर कार्रवाई ने गत 6 जून को कई घरों के चिराग बुझा दिए। इस दौरान पांच बेकसूर बेमौत मारे गए। इनका कसूर सिर्फ इतना है कि किसानों के आंदोलन में शामिल हो कर  नारेबाजी  कर रहे थे। मारे गए लोगों में कोई भी आंदोलन का नेता नहीं था। मरने वाले में एक 19 वर्षीय लड़का जो12वीं का छात्र था। एक 25 वर्षीय लड़का जिसकी दो महीने पहले ही शादी हुई थी।एक 35 वर्षीय व्यक्ति दिहाड़ी मजदूर था। बाकी दो खेती खेतहर मजदूर हैं।आओं जाने कौन हैं मंदसौर के पिपलिया मंडी में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से बेमौत बेकसूर मारे गए लोग-1- अभिषेक दिनेश पाटीदार- 12वीं में जीव विज्ञान का छात्र अभिषेक चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उसका परिवार मंदसौर-नीमच हाईवे पर स्थित बरखेड़ा पंथ गांव में रहता हैं। मंगलवार को उसके परिजनों और अन्य गांववालों ने अभिषेक का शव हाईवे पर रखकर सड़क जाम किया था। मौके पर पहुंचे डीएम स्वतंत्र कुमार सिंह के संग गांववालों की धक्कामुक्की भी हो गई। अभिषेक के पिता दिनेश को परिवार की 28 बीघा खेती की जमीन में अभी तक उनका हिस्सा नहीं मिला है। दिनेश के अनुसार अभिषेक केवल नारे लगा रहे थे लेकिन पुलिस ने उसे नजदीक से गोरी मार दी।

2- पूनमचंद उर्फ बबलू जगदीश पाटीदार- पिपलिया मंडी से 25 किलोमीटर दूर स्थित तकरवाड़ गांव के रहने वाले पूनमचंद के पिता का जनवरी 2016 में देहांत हुआ था। बीएससी की पढ़ाई कर रहे पूनमचंद ने दूसरे साल में ही पढ़ाई छोड़ दी और खेती करने लगे। उनके पास सात बीघा पारिवारिक जमीन थी लेकिन आधिकारिक तौर पर उनके नाम नहीं हुई थी। उनकी शादी हो चुकी थी और वो इस बात से परेशा थे कि सोयाबीन, अदरक और गेंहूं की उनकी फसल लागत भी नहीं निकाल पाएगी। उनके रिश्तेदार सुभाष पाटीदार के अनुसार पुलिस की गोली सबसे पहले पूनमचंद को लगी और उसके बाद कन्हैयालाल को।

3- चैनराम गनपत पाटीदार- नयाखेड़ा गांव के चैनराम की 29 अप्रैल को अक्षय तृतिया के दिन शादी हुई थी। उनके पिता के पास दो बीघा जमीन है और वो खेती मजदूर के तौर पर भी काम करते हैं। चैनराम के पिता के अनुसार वो सेना में भर्ती होना चाहता था। चैनराम तीन बार सेना के भर्ती कैंप में जा चुका था लेकिन सफल नहीं हो सका। परिवारवालों के अनुसार चैनराम एक आंख में कुछ समस्या होने के कारण मेडिकल में छंट जाता था।

4- सत्यनारायण मांगीलाल धनगर- मंदसौर से 20 किलोमीटर दूर स्थित लोध गांव के सत्यनारायण सातवीं तक पढ़े थे। वो दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते थे और काम मिलने पर एक दिन में 200 रुपये कमा पाते थे। सत्यनारायण की अभी शादी नहीं हुई थी। उनके परिवार के पास करीब छह बीघा जमीन है लेकिन उनके नाम पर कोई जमीन नहीं थी।

5- कन्हैयालाल धुरीलाल पाटीदार- दो बच्चों के पिता कन्हैयालाल आठवीं तक पढ़े थे। चिल्लौड़ पिपलिया गांव के रहने वाले कन्हैयालाल की 16 वर्षीय बेटी और 11 वर्षीय बेटे स्कूल जाते हैं। कन्हैयालाल और उनके तीन भाइयों के पास कुल सात बीघा जमीन है।

 
 
Advertisment
 
Important Links
 
Important RSS Feed
MP Info RSS
Swatantra Khat RSS
 
वीडियो गेलरी




More
 
फोटो गेलरी
More
 
हमारे बारे में हमसे संपर्क करें      विज्ञापन दरें      आपके सुझाव      संस्थान      गोपनीयता और कुकीज नीति    
Copyright © 2011-2022 Swatantra Khat